छठ पर्व

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नेहा – दिनांक 26/10/17

छठ पर्व सूर्य देव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। दिवाली के बाद सबसे बड़ा त्योहार आता है। छठ का पर्व एक साल में दो बार आता है। पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में। इस दिन लोग सूर्य को अच्छी सेहत देने, खुशियां और उनकी और उनकी संतानों की रक्षा करने के लिए करते हैं। ये पर्व सूर्य और उसकी शक्ति को समर्पित होता है।  छठ पूजा  बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। छठ पर्व को लेकर अनेक मान्यताएं हैं, जिसमे से एक सूर्य पुत्र कर्ण की प्रसिद्ध है, सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के पुत्र एवं परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते  थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। छठ चार दिवसीय पर्व हैं। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, फल, मिठाई आदि प्रसिद्ध है।

1) इसमें पहला दिन नहाय खाए की विधि की जाती है। इस दिन स्‍वयं और आसपास के माहौल को साफ सुथरा किया जाता है, लोग अपने घर की सफाई करते हैं व्रती और उसके परिवारजन मन को तामसिक भोजन से दूर कर पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन ही लेते हैं।

2) दूसरे दिन खरना की विधि की जाती है, खरना का मतलब है पूरे दिन का उपवास।  व्रती व्‍यक्ति इस दिन जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते शाम होने पर गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बना कर बांटा जाता है।

3) तीसरे दिन, इस दिन शाम का अर्घ्य दिया जाता है, सूर्य षष्ठी को छठ पूजा का तीसरा दिन होता है, पूरे दिन के उपवास के बाद शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

4) चौथे दिन सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना होता है और उगते सूर्य को अर्घ्य देना होता है। अर्घ्य देने के बाद घाट पर छठ माता से संतान-रक्षा और घर परिवार के सुख शांति का वर मांगा जाता है. इस पूजन के बाद सभी में प्रसाद बांट कर फिर व्रती खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोल लेते हैं।

इस प्रकार छठ पर्व हर्षोलास के साथ संपन्न किया जाता है।

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